चंद शेर एक ख़याल
दर्द मिला है तो एवज में दवा भी मिली
राहे इन्साफ पे दोस्तों से दुवा भी मिली
इतनी भी नाकाम न रही उल्फ़त यारों
बुझते चरागे लौ को कभी कभी हवा भी मिली
ना आशना तो कोई नश्तर भी न होगा
तराश कर संग को मूरत भी मिली
टूटें है अगर दिल तो कोई बात नहीं
टुकड़े टुकड़े पर माशूक की तस्वीर भी मिली
हर दिल इक तमन्ना में बसर करता है
हर दिल को बेवफाई की सौगात भी मिली
अपना क्या है मुकद्दर का करिश्मा है
अपाहिज हुए तो कोशिश की बैसाखी भी मिली
ख्वाबों सितारों की सैर कब तक करें 'रवि'
के ठोकरों से बुलंदी की नसीहत भी मिली
कवि 'रवि'

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