Saturday, 30 March 2024

राम राम जय राजा राम

तुम जो चाहो समझो मुझको 

मैं तो हूं नंगा फकीर

राम राम बस रटते रहना

मेरे जीवन की तासीर 

ना मांगने की है नीयत 

ना है देने की औकात 

चंद सांसे लेकर आया

इतनी सी ही है सौगात 

राम कहो भाई राम कहो

वो ही बेड़ा पार करे

जीवन क्या है बहती नैया

वृथा ऐहिक से प्यार करे

कहे 'रवि' ऐ सुन भाई साधो

एकही एक है तेरो धाम

राम चरण और बाकी न कोई

स्मरते रहना अपना काम

कवि 'रवि'

Thursday, 28 March 2024

ये मेरा देश है ऐसा

सहस्त्रों वर्षों का इतिहास लिये
हमारी संस्कृति अविरल धारा के मानिंद बढ़ती आयी है
राक्षसों का निर्दालन करने यहां देवों ने अवतार लिये
तत्वों को सोपान बना कर अनेकों सम्राट हुए
आज परंतु दुष्टों की
देखो यहां भरमार हुई
जनता को भरमाने हेतु
रेवड़ियों की बौछार हुई
कोई जाता जेल ये कहकर
मैं तो हितकारी हूं
रोज़ बांटता ढेरों व्यंजन
जनता का कैवारी हूं 
स्वार्थ मात्र के लिए बेच दूं आप स्वयं को
ना हिचकूं मैं
नीलामी पर लाने देश को
कोई गुंडा चिल्लाता है
मुझपर है अन्याय हुआ
धमकाए भी न्यायालय को
यह तो अत्याचार हुआ
रामप्रभू अब आसिन है
वे ही सच्चा न्याय करें
अनिष्ट सारा समाप्त कर के
सत्य कृति का उद्धार करें
कवि 'रवि'

Monday, 4 March 2024

शरद पुराण


जन्मोजन्मी तुम्ही जात पात केली
म्हणूनी विठ्ठलाने तुमची वाताहत केली.... जन्मोजन्मी तुम्ही
असुनी मराठा तरीही 'कुणबी'नोंद केली
जो ही आला जवळी त्याची दिशाभूल केली
'शरद' असूनी वृत्ती प्रेम आटलेली
स्वार्थ स्वार्थ हीच तुम्ही दिशा आखलेली.. जन्मोजन्मी
'शर' द झालियाने बहू विद्ध केले
गुरू ते ही कुटील पणाने तुम्ही बद्ध केले
परदु:खासी तुम्ही साधन मानीले
अशी कशी वृत्ती तुमची माया आटलेली..... जन्मोजन्मी
'रवि' म्हणे ऐका आता सर्व अती झाले
स्वार्थापोटी तुमच्या तुम्ही असे त्याज्य झाले
मुलं नातवंडं तुमचे किंचित राहिले
लबाड वृत्तीने तुमची अशी दशा केली.... जन्मोजन्मी
जन्मोजन्मी तुम्ही जात पात केली
म्हणुनी विठ्ठलाने तुमची वाताहत केली
कवि 'रवि'