राम राम जय राजा राम
तुम जो चाहो समझो मुझको
मैं तो हूं नंगा फकीर
राम राम बस रटते रहना
मेरे जीवन की तासीर
ना मांगने की है नीयत
ना है देने की औकात
चंद सांसे लेकर आया
इतनी सी ही है सौगात
राम कहो भाई राम कहो
वो ही बेड़ा पार करे
जीवन क्या है बहती नैया
वृथा ऐहिक से प्यार करे
कहे 'रवि' ऐ सुन भाई साधो
एकही एक है तेरो धाम
राम चरण और बाकी न कोई
स्मरते रहना अपना काम
कवि 'रवि'
