Wednesday, 22 May 2024

वस्ल की रातों का सफर

वस्ल की रातों का तन्हा होना 
चांद के दीदार का इंतजार होना 
गर्दिश में हस्ती का फ़ना होना 
रूह की तड़पन का ऐतबार होना 
उम्र दराज का असर नज़र पर होना 
रस्मों की दीवारों का पर्दा होना 
 जिंदगी का मज्हार में बसर होना 
कैसा सिला पाया हमने 
हुस्न के क़फ़स में अगुवा होना 
कवि 'रवि'

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