वस्ल की रातों का सफर
वस्ल की रातों का तन्हा होना
चांद के दीदार का इंतजार होना
गर्दिश में हस्ती का फ़ना होना
रूह की तड़पन का ऐतबार होना
उम्र दराज का असर नज़र पर होना
रस्मों की दीवारों का पर्दा होना
जिंदगी का मज्हार में बसर होना
कैसा सिला पाया हमने
हुस्न के क़फ़स में अगुवा होना
कवि 'रवि'

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