Tuesday, 2 July 2024

जन-मन की कामना

जन-मन की कामना है 
हिंदू राष्ट्र यह कहलाए 
विश्व भर में ध्वजा 
सनातन की अखंड लहराए 
महारथीयों की भूमि यह 
धर्म की उत्कर्षा है 
सत्य जिलाने शक्ति 
करती रक्त की वर्षा है 
देह तो है नश्वर यह किंतु 
चरित्र अजरामर है 
युद्ध भूमि को अर्पित 
जीवन लड़ने को तत्पर है 
हम योद्धा है धर्म राष्ट्र के 
हमें नहीं भय कुछ भी 
शत्रु का शिर छेदने सक्षम
धैर्य शौर्य और वीर्य भी
मुझ पर है उपकार मां तेरा 
पुत्र तेरा कहलाया 
राष्ट्र धर्म नीति से बढ़कर
 कुछ नहीं हमको भाया 
एक अपेक्षा धर्म बंधुओं 
जागृत अब हो जाओ 
शत्रु का नि:पात करने 
अब जागो और जगाओ 
कवि 'रवि' 

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