Saturday, 31 August 2024

उमड़ घुमड़ कर

उमड़ घुमड़ कर बादल छाए 

वर्षा की सौगात ले आए 

प्रसन्नता से भरी धरित्री 

जन-जीवन पर यौवन लाए 

          खेतों में लहराती फसलें 

          देख पक्षियों के दिल मचले 

          कृषक कहे हे महादेव तुम 

          हम सबके त्राता हो 'भोले'

जय जय जय हे जग नियंता 

मात पिता तुम तुमही भ्राता 

स्विकार करो तुम सेवा मेरी 

छट जाएं अब रात अंधेरी 

          हर हर हर हर महादेव 

          हर हर हर हर महादेव 

कवि 'रवि' 


Saturday, 24 August 2024

है आस क्यों उसकी अभी

है आस क्यों उसकी अभी 
जिसको कभी चाहा नहीं 

                    थी महफिलें राहे अदल पर 
                    यूं कोई शय भरमाया नहीं 
वो नाजिरे मैकश मुझे 
लाख उकसाता रहा 
                    बाद तौबा के ये दिल 
                    जूस्तजू कर पाया नहीं 
आजकल जब तिश्नगी 
चाहत बनीं ही है 'रवि'
                    झोंक दे खुद को भंवर में 
                    के साथ साया भी नहीं 

कवि 'रवि' 

Sunday, 18 August 2024

गुन्हा काय आहे!?

खरे बोलणे हा गुन्हा काय आहे 
असे वागणे हा गुन्हा काय आहे 

जयांच्या जिभेला नसे हाड काही 
झुगारू तयांना.... गुन्हा काय आहे 

अहंमन्यता ती उसंडे जयांची 
तिला थोपवावे.... गुन्हा काय आहे 

मनीं दंभ ठेवी श्रीमंती कशाची 
अशां नागवीता.... गुन्हा काय आहे 

दिसेना जयांना व्यथा वंचितांची 
अशांना ठोकावे.... गुन्हा काय आहे 

'रवि' आज दुनिया खऱ्याच्या युगाची 
युगासंगे जावे.... गुन्हा काय आहे 

कवि 'रवि'