उमड़ घुमड़ कर
उमड़ घुमड़ कर बादल छाए
वर्षा की सौगात ले आए
प्रसन्नता से भरी धरित्री
जन-जीवन पर यौवन लाए
खेतों में लहराती फसलें
देख पक्षियों के दिल मचले
कृषक कहे हे महादेव तुम
हम सबके त्राता हो 'भोले'
जय जय जय हे जग नियंता
मात पिता तुम तुमही भ्राता
स्विकार करो तुम सेवा मेरी
छट जाएं अब रात अंधेरी
हर हर हर हर महादेव
हर हर हर हर महादेव
कवि 'रवि'
