Saturday, 31 August 2024

उमड़ घुमड़ कर

उमड़ घुमड़ कर बादल छाए 

वर्षा की सौगात ले आए 

प्रसन्नता से भरी धरित्री 

जन-जीवन पर यौवन लाए 

          खेतों में लहराती फसलें 

          देख पक्षियों के दिल मचले 

          कृषक कहे हे महादेव तुम 

          हम सबके त्राता हो 'भोले'

जय जय जय हे जग नियंता 

मात पिता तुम तुमही भ्राता 

स्विकार करो तुम सेवा मेरी 

छट जाएं अब रात अंधेरी 

          हर हर हर हर महादेव 

          हर हर हर हर महादेव 

कवि 'रवि' 


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