Monday, 20 January 2025

एक शेर

लोग अक्सर के मेरा रिंदाना याद रखते हैं 
चोटों में लगी वो आग मगर भूल जाते हैं 
दिले आशना ये कैसी कश्मकश है 
दरे मयकदे पे तुझको ज़ख्म याद आते है

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