अपनी मस्ती में जीने का तरफदार हूं मैं
अपनी मस्ती में जीने का तरफदार हूं मैं
दुनिया जहां से अलग किरदार हूं मैं
नावाकिफ है मुझसे ऐसा कोई गमख्वार नहीं
अलबत्ता उनके खयालों से नाफर्मादार हूं मैं
देख कर मेरा तकदीर जिन्हें तरस आता है
उनकी बेखुदी का रूबरू इजहार हूं मैं
'रवि' अब चल अजल को ये बर्दाश्त नहीं
कह रहा है तेरे हुनर का चश्में यार हूं मैं
कवि 'रवि'

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home