राष्ट्र गान
उत्तुंग है हिमालय सुखदायी सारी नदियाँ।
हिन्दोस्ताँ पे अपने है नाज़ करती दुनिया ॥
विज्ञान और धरम का यहाँ मेल है सुहाना !
उद्योग और कृषी का सही मोल हमने जाना ||
अभिमान से उठे सर करते हैं कर्म ऐसा।
विद्या, कला, अध्यात्म में
जग में न कोई हम जैसा ॥
शस्त्रास्त्र और शास्त्र से
शांति की ही कामना
शौर्य भी और धैर्य भी हो
मां भारती! यही मांगना
कवि'रवि'

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