Saturday, 12 June 2021

ऐतमाद

दोस्त वही जिसकी नज़र नजरों से होकर दिल में उतर जाती है
नजरों के आइने पर दिल की कहानी उतार लाती है
मेरे चेहरे पे जो नज़र आती हैं
कहकहों की कतारें
वो जानता है कहां से उधार आती है
ना रोक! 
कहता है मुझे
उमड़ते वो आंसू
इस कश्मकश में उसे
मेरी नादानी नज़र आती है
कवि'रवि'

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