ऐतमाद
दोस्त वही जिसकी नज़र नजरों से होकर दिल में उतर जाती है
नजरों के आइने पर दिल की कहानी उतार लाती है
मेरे चेहरे पे जो नज़र आती हैं
कहकहों की कतारें
वो जानता है कहां से उधार आती है
ना रोक!
कहता है मुझे
उमड़ते वो आंसू
इस कश्मकश में उसे
मेरी नादानी नज़र आती है
कवि'रवि'

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