दिल की कशिश
इक दूसरे की खुशी और ग़म में
कौन यहाँ शामिल होता है।
देने तसल्ली हर इक पल में,
अपना ही वो दिल होता है।
ख्वाब सजाकर राह पे चलते
मेरा हौसला ही है साथी
थकने पर भी साथ ना छोड़े,
अपना ही वो दिल होता है।
मेरे संग चलने पर अक्सर
दर्द ही पाये है उसने
टुटने पर भी आस बँधाए
अपना ही वो दिल होता हो
कवि'रवि'

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