Tuesday, 15 June 2021

दिल की कशिश

इक दूसरे की खुशी और ग़म में 
कौन यहाँ शामिल होता है।
 देने तसल्ली हर इक पल में, 
अपना ही वो दिल होता है। 
ख्वाब सजाकर राह पे चलते 
मेरा हौसला ही है साथी 
थकने पर भी साथ ना छोड़े, 
अपना ही वो दिल होता है। 
मेरे संग चलने पर अक्सर 
दर्द ही पाये है उसने
टुटने पर भी आस बँधाए 
अपना ही वो दिल होता हो
कवि'रवि'

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