Saturday, 12 June 2021

सुकून

हर शब की शहर नयी होती है
आफताब की नजर नयी होती है 
रोशन होता है जहाँका हर मंजर 
मंजिल की खबर नयी होती है
नया दौर, हौसले भी नये होते है 
आरजुओं की फेहरिस्त अक्सर नयी होती है
दुआऐं, मन्नतें, इक्बालो मदद 
हर अदा की अदाऐं नयी होती है
ढलते शाम के आगोश में
पहुंचकर होता है हिसाब
दिल को समझाने की लज्ज़त नयी होती है
कर हवाले निंद के सोता है हर इन्सान
पुर सुकूँ इस ख्याल से 
हर शब की सहर नयी होती है
कवि'रवि'

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