पांडुरंग पांडुरंग
सुप्रभात मित्रवर, आज महाराष्ट्र-आंध्र-तेलंगना-कर्नाटक के आराध्य दैवत श्री विठ्ठल पांडुरंग पंढरीनाथ महाराज जी के उत्सव का दिवस है। संपूर्ण भारत में आज देवशयनी एकादशी भी मनाई जाएगी। ऐसी पावन बेला पर मन की प्रसन्नता बढाने में सहायक मित्रों की शुभकामनाएं प्राप्त होती है तो होंठों पर अनायास ही शब्द आ जाते हैं " पांडुरंग पांडुरंग, पंढरीनाथ महाराज की जय"। ऐसी मान्यता है कि भक्त पुंडलिक के खातिर साक्षात भगवान विष्णु यहां पंढरपुर में पधारे, पंहुचे तो पुंडलिक अपने पिता की सेवा में व्यस्त थे, भगवान ने पुकारा पुंडलिका मैं आया हूं! तो पुंडलिक बोले मैं माता-पिता की सेवा कर रहा हूं, उठ नहीं सकता, थोडी प्रतिक्षा करो। तो भगवान बोले 'मुझे आसन तो दो', भक्त पुंडलिक ने सामने ईंट नज़र आई तो वही बाहर फेंक कर कहा 'लो' विराजमान हो जाओ। तो प्रभु उस ईंट पर खड़े हो गए। युगे अठ्ठाविस विटेवरी उभा, कर कटावरी ठेवोनिया। तभी से पंढरीनाथ महाराज हाथ कमर पर धरे ईंट पर विराजमान है। हरि पांडुरंग भक्तवत्सल है, दिन दुखियारों की माऊली है। पांडुरंग पांडुरंग पांडुरंग पांडुरंग 🙏🙏🙏🙏

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