श्री कृष्णावतार का औचित्य
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्यत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम......परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम् धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे 🙏 जग के पालनहार भगवान श्री विष्णू के उक्ति नुसार जब जब इस ब्रह्माण्ड में अधर्म का साम्राज्य पनपता है और शुचिता का विलय होने की स्थिति उत्पन्न होती है प्रभु स्वयं अवतार लेकर फिर से सुव्यवस्था स्थापित करते हैं। जब भी कभी ऐसी पुनर्स्थापना की प्रक्रिया की जाती है तो मनुष्य जाति में बडा संघर्ष हो कर जीव हानि तथा पृथ्वी को भी बडा नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन मानवता जीवंत रखने के लिए जगत नियंंता यह करते हैं। ऐसे ही स्थिति को सुधारने के लिए भगवान श्री कृष्ण का जन्म आज ही के दिन हुआ था और उस के परिणाम स्वरूप मानव जाति का अस्तित्व आज तक है। वर्तमान समय में हम देख रहे हैं कि फिर से अधर्म, कुतर्क और कुटिल प्रवृत्तियों को बल मिलता जा रहा है। स्वार्थवश कितनी-कितनी अधार्मिक कृतियां हरदिन होती है। मनुष्य जाति का अवास्तव प्रकोप इस धरती का अमर्याद शोषण कर रहा है और उस होड़ में सर्वनाश को आमंत्रण देता जा रहा है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार हम मनाते हैं, क्या संदेश या बोध हमें लेना चाहिए? दुनिया में हर किसी को दशावतारों का अर्थात् श्रीमद्भागवत का अध्ययन सूक्ष्मतापूर्वक करना चाहिए और विशेषकर उन्हें जो सत्ता पद पर आसीन होते हैं। भगवान श्री राम और कृष्ण के चरित्र सदैव ही त्रिकालाबाधित है और उपयुक्त है। आज के इस स्वर्णिम अवसर पर कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाते हुए आओ हम प्रण करें कि हम सनातन धर्म की ध्वजा को उत्तुंग रखने के लिए अपने ऊर्जा का प्रयोग सर्वशक्ति से करेंगे। श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सभी को शुभकामनाएं। 🙏
कवि'रवि'
