Sunday, 29 August 2021

श्री कृष्णावतार का औचित्य

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्यत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम......परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम् धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे 🙏 जग के पालनहार भगवान श्री विष्णू के उक्ति नुसार जब जब इस ब्रह्माण्ड में अधर्म का साम्राज्य पनपता है और शुचिता का विलय होने की स्थिति उत्पन्न होती है प्रभु स्वयं अवतार लेकर फिर से सुव्यवस्था स्थापित करते हैं। जब भी कभी ऐसी पुनर्स्थापना की प्रक्रिया की जाती है तो मनुष्य जाति में बडा संघर्ष हो कर जीव हानि तथा पृथ्वी को भी बडा नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन मानवता जीवंत रखने के लिए जगत नियंंता यह करते हैं। ऐसे ही स्थिति को सुधारने के लिए भगवान श्री कृष्ण का जन्म आज ही के दिन हुआ था और उस के परिणाम स्वरूप मानव जाति का अस्तित्व आज तक है। वर्तमान समय में हम देख रहे हैं कि फिर से अधर्म, कुतर्क और कुटिल प्रवृत्तियों को बल मिलता जा रहा है। स्वार्थवश कितनी-कितनी अधार्मिक कृतियां हरदिन होती है। मनुष्य जाति का अवास्तव प्रकोप इस धरती का अमर्याद शोषण कर रहा है और उस होड़ में सर्वनाश को आमंत्रण देता जा रहा है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार हम मनाते हैं,  क्या संदेश या बोध हमें लेना चाहिए? दुनिया में हर किसी को दशावतारों का अर्थात् श्रीमद्भागवत  का अध्ययन सूक्ष्मतापूर्वक करना चाहिए और विशेषकर उन्हें जो सत्ता पद पर आसीन होते हैं। भगवान श्री राम और कृष्ण के चरित्र सदैव ही त्रिकालाबाधित है और उपयुक्त है। आज के इस स्वर्णिम अवसर पर कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाते हुए आओ हम प्रण करें कि हम सनातन धर्म की ध्वजा को उत्तुंग रखने के लिए अपने ऊर्जा का प्रयोग सर्वशक्ति से करेंगे। श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सभी को शुभकामनाएं। 🙏
कवि'रवि'

Thursday, 19 August 2021

आखरी ख्वाहिश

जुनून है के अब देश की खातिर ही मर जाएॅं
नायाब सा एक काम ईस जनम् में कर जाएॅं
वक्त और दस्तूर जब मिल आये है साथ साथ
मौका है अपने नाम को अजरामर ही कर जाएॅं
ईस माटी का ऋण जो पुश्तों पे है चढा
अब अपने हाथों भरसक चुका जाएॅं
ऐ वतन तेरी सौंधी हवा है प्यासे दिल की दवा
सीने में आखरी सॉंस अब झूम के भर जाएॅं
© रवींद्र सरदेशमुख

Wednesday, 18 August 2021

आज और अफगान

अफगानिस्तान का सूरते हाल देखकर १४५० साल पहले मध्य पूर्व की सामाजिक स्थिति कैसी रही होगी इस बात को अनुभव किया जा सकता है। अफगानिस्तान एक ऐसा देश जहां २०वी सदी में तत्कालीन सोवियत संघ कब्जा जमाए बैठा था १० वर्ष तक। नरसंहार तथा वाणिज्य की हानि के साथ जनता को सु शिक्षा से भी वंचित रहना पडा। अफगान मुजाहिदीन के नाम पर रशिया से लडने वाला संगठन रशिया के वापसी के साथ गुटबाजी के चलते टूट गया और तालीबान नामक मूलतत्व वादी तथा बर्बर शासन के अनुगामी अपत्य को जन्म दे गया। रशियन माफिया ने इस दौरान सारे जगत में अपनी पैठ पुख्ता कर ली। 
६ वर्ष तक इस अमानवीय तालिबान ने हजारों अफगानियों का कत्लोगारत किया और फिर एक बार वहां अमरिका सक्रिय हो उठी अफगान में सुस्थिती लाने के लिए।
२० वर्ष तक लाखों करोड़ों डॉलर बर्बाद करने के पश्चात्, अफगानिस्तान के सामान्य मानवी को उपलब्धि क्या है तो फिर एक बार तालिबान! दुनिया में सर्वश्रेष्ठ समझने वाले अमेरिकी नेतृत्व की बुद्धि मत्ता किस तरह की है इसका ताज़ा उदाहरण है अफगानिस्तान।
भारत जो कि अफगानिस्तान का पड़ोसी है आज भी यह मानता है कि यह प्रदेश अखंड भारत का एक हिस्सा है जो कि अंग्रेजों के कुटिल राजनीति का शिकार हो कर टूट गया और इसी कारण वहां की जनता को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राधान्य देकर विकास की सौगात दिलाने में रुचि रखता है।
बदलते समय के साथ चलने की आवश्यकता को अफगानियों सूझबूझ दिखानी होगी और जनताभिमुख शासन पुनः स्थापित करना होगा।
रहा भारत के सहयोग का प्रश्न तो भारत सदैव पीडितों का पक्षधर है और रहेगा, शर्त यही है कि विकासोन्मुख राजनीतिक स्थिति पैदा की जाए। 
वर्तमान भारतीय परिप्रेक्ष्य में चंद असंतुष्ट नेता उत्साहित होकर अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज होने पर बड़े खुश हुए हैं और अपनी ज़हालत का इजहार कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि इतने दशकों के बाद भी तालिबान एक प्रयास भर रहा है, जनमानस पर बाखुशी स्थापित नहीं हो सके। सदियों पुरानी रीति-रिवाजों को वर्तमान युग में जस के तस लागू करने की चाह रखने वाले आंख और बुद्धि दोनों का अंधापन ही प्रस्तुत कर रहे हैं। नतीजतन फिर एक बार अफ़गानी जनता को बर्बर शासकों को झेलना है तब तक कि वे एकजुट होकर समग्र अफगानिस्तान के विकास को बढ़ावा नहीं देते।


Thursday, 5 August 2021

आज़ादी के दीवानों ने

आज़ादी के दीवानों ने
यह सपना संजोया होगा
देश का अपने बच्चा-बच्चा
राष्ट्र भक्त ही पैदा होगा..........१
नहीं पता पर उनको यह, की
जयचंदों की कमी नहीं
महामूर्ख कोई 'बापू' जिसने
ऐसा 'गबन' बसाया होगा.........२
चचा चचा कहलाने वाला
वो ढोंगी साबीत हुआ
अपनों ही को चूस चूस कर
उसने 'दमन' कराया होगा..........३
अब ७० सालों के दुखडे
७ साल में ख़त्म हो कैसे
सोच सोच कर परिस्थिति ने
'मोदी' को भी रुलाया होगा.........४
आज़ादी तो मिलीं हमें वो
तुम सब के बलिदान का रुप है
जहां कहीं भी हो तुम, देखो
हमने वतन जिलाया होगा..........५
हमने वतन जिलाया होगा
भारत माता की जय
कवि'रवि'

लॉक डाउन की लूट मची है

लॉक डाउन की लूट मची है
जो चाहे तू लूट रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
सत्य हकीकत तेरी बंधक और खुला है झूठ
                            रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
क्या गरीब क्या अमीर सबही
                                 तुम्हरी दूभती गायें हैं
मध्यम वर्ग यहां का हरदम
                               शोषण का भरमाया है
लाज शरम सब निचोड़ फेंको
   डालो हममें फूट...रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
दवा इलाज सब धंधा करके
                            जीना भी दुश्वार किया है
रोजी रोटी से हम सबको
                          बे मुद्दत मोहताज किया है
मौत मुसीबत बन के हमपर
क्यों गयी है रूठ....रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
कवि'रवि'