लॉक डाउन की लूट मची है
लॉक डाउन की लूट मची है
जो चाहे तू लूट रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
सत्य हकीकत तेरी बंधक और खुला है झूठ
रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
क्या गरीब क्या अमीर सबही
तुम्हरी दूभती गायें हैं
मध्यम वर्ग यहां का हरदम
शोषण का भरमाया है
लाज शरम सब निचोड़ फेंको
डालो हममें फूट...रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
दवा इलाज सब धंधा करके
जीना भी दुश्वार किया है
रोजी रोटी से हम सबको
बे मुद्दत मोहताज किया है
मौत मुसीबत बन के हमपर
क्यों गयी है रूठ....रे मंत्री जो चाहे उसे लूट
कवि'रवि'

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