Saturday, 12 February 2022

जुनून

जुनून है के अब 
देश की खातिर ही मर जाएं
नायाब सा एक काम 
ईस जनम् में कर जाएं
वक्त और दस्तूर 
जब मिल आये है साथ साथ
मौका है अपने नाम को 
अजरामर ही कर जाएं
ईस माटी का ऋण 
जो पुश्तों पे है चढा
अब अपने हाथों 
भरसक चुका जाएं
ऐ वतन तेरी सौंधी हवा 
है प्यासे दिल की दवा
सीने में आखरी सॉंस 
अब झूम के भर जाएं
कवि'रवि'

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