परम पूजनीय श्रीमान गोलवलकर गुरूजी
भारतीय संस्कृति एवं हिंदु जनजागृति को समर्पित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूजनीय श्रीमान गोलवलकर गुरूजी का जन्म दिन आज है। उच्च विद्या विभूषित श्री गुरुजी हिंदु धर्म के गाढ़े अभ्यासक थे। १९०६ वर्ष उनका जन्म वर्ष है और १९७३ उनके देहांत का वर्ष है। आजन्म स्वयंसेवक रहे श्री गुरुजी सन १९४०से १९७३तक सरसंघचालक रहे। परम पूजनीय आद्य सरसंघचालक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी पर उनकी नितांत श्रद्धा थी और डॉक्टर साहब के निस्सिम अनुयाई भी बने रहे। उनके आचरण में अथवा वक्तव्य में कदापि राजनीति का अन्तर्भाव नहीं रहता था, बस धर्म रक्षा, मानव सेवा और वैश्विक एकात्मता का संकल्प लिए वे लाखों स्वयंसेवकों का आदर्श बने रहे। समाज में जहां कहीं पीडा नजर आई, श्री गुरुजी ने उसका निराकरण करने हेतु संघ स्वयंसेवकों को प्रेरित किया। संघ प्रचारकों का एक वैषिष्ट्य होता है कि वे हिंदुस्थान के लगभग सभी प्रदेशों से वाकिफ होते हैं, इस उपक्रम के बहुधा श्री गुरुजी उत्तम उदाहरण थे। सन्यस्त वृत्ति के कारण उनके चेहरे पर एक विलक्षण प्रतिभा दृगोचर होती थी। विद्वत्ता से प्रचुर उनके बौद्धिक, संघ स्वयंसेवकों के लिए संपदा समान है, और उनके द्वारा बताए गए अमृत वचन वर्तमान में भी दिशा दर्शन के कारक हैं। संघ कार्य से किसी भी प्रकार की प्रसिद्धि या वैयक्तिक लाभ की अपेक्षा नहीं रखी जानी चाहिए ऐसा अलिखित नियम संघ अनुशासन में है, और डॉक्टर जी से लेकर वर्तमान सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी तक सभी के चरित्रों का यह प्राथमिक स्वभाव दर्शन है।
बाल्यावस्था से संघ के साथ जुड़े रहने वाले लक्षावधी संघ स्वयंसेवकों तथा संघ अधिकारी गण के मन का भाव भी इन्हीं संस्कारों को अग्रेषित करता है। इस सदा वत्सल मातृभूमि का जन्मोपात्त ऋण मानकर उसकी सेवा करना अपना दायित्व समझने की परंपरा संघ में विकसित होती है और राष्ट्र धर्म से प्रेरित अधिकारी गण के सान्निध्य में ऐसे करोड़ों युवा प्रतिवर्ष संघ विचारों का अनुसरण करते हैं।
आगामी सन २०२५ में संघ की स्थापना को १०० वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।और सारा विश्व इस बात को एक अजूबा मानती है कि एक ऐसा संगठन जिसे केवल और केवल जन मन का सहकार्य प्राप्त है, दिनों दिन वर्धीष्णु है। इसी में संघ के चिरस्थाई मूल्यों का महत्व प्रतीत होता है।
आइये आज हम गर्व के साथ अपने इस महान समाजसेवी को, "श्री गुरुजी" को अभिवादन करें और प्रतिज्ञा करें कि 'यावत्चंद्र दिवाकरौ' हम राष्ट्र कार्य में अपना योगदान अर्पित करते रहेंगे।
भारत माता की जय
कवि'रवि'

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