रिश्तों की रवायत
ईन्सान को ईन्सान बनाने की जुगत पाई जाये
कोई औरही भगवान की व्यवस्था कराई जाये
युं तो हजारों हो गये पत्थर को तराशने वाले
अब के ईन्सानी फितरत को तराशा जाये
बदलना है अगर इस जमाने का उसूल
जीवन के हर तबके को सुधारा जाये
कोई कहें न कहें कुदरत हिसाब करती हैं
अपनों की भलाई में खुद को भुलाया जाये
के रिश्ते होते हैं निभाने के लिए 'रवि'
रिश्तों की गांठ में पेंच पड़ने न दिया जाये
कवि 'रवि'

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