एक अनछुई आशा
उनके नन्हे कदम ऐसे चलते रहे
देखकर अपने अरमान मचलते रहे
एकही आरजू ......युंही फुलो फलो
नई मंजिलें .....करलो हासिल चलो
देश की, राष्ट्र की अगली पीढी हो तुम
सुगमतर वो कल के ...शिल्पी हो तुम
पढ़ो और बढो......... ज्ञान दानी बनो
जहां शांति से क्रांति हो ऐसी वाणी सुनो
हमारी उमंगे.............जो खोयी रहीं
चलो आज से..... उनकी आशा बनो
हमें ज्ञात हैं ........राष्ट्र हैं उच्च अपना
अपने कलापों से इस जग की भाषा बनो
कवि'रवि'

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