Wednesday, 27 April 2022

श्याम तुम्हारे अधर की बन्सी

श्याम तुम्हारे अधर की बन्सी
नादमधुर सुर को जन्माती
सुनकर रम्य लय उस धुन की
गोप गोपियां भी भरमाती
श्याम तुम्हारे चतुर जिव्हा ने
घोर धुरंधर यूं भरमाये
ना करते जो नमन किसी को
तुम्हें भजने में नहीं शर्माएं
श्याम तुम ही हो जग जन जीवन
तुमही सांसें तुमही चितवन
श्याम तुम्हारे बिन सब "छाया" (अंधकार)
वृथा 'कृतार्थ' सब मोह माया
कवि'रवि'

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