Tuesday, 13 June 2023

मैं और मेरा मय का पियाला

जाम लबालब मय में तरन्नुम
दिले मौसिकी और बहकापन
इक इक लम्हा नाच रहा है
थिरक रही है इक इक धड़कन

मैं और मेरा मय का पियाला
खुदा गवाह है सबसे आला
जो छू ले मदमस्त हो जाए
नहीं रह जायें कोई निराला

रोज़ पियो और रोज़ जियो तुम
कुदरत की हर चीज़ जियो तुम
नयन नक्श से एक है सब तो
क्यों नस्लों के भूखे हो तुम

कहता है कवि 'रवि' सभी से
तोडो फर्जी दीवारें अभी से 
आओ चलकर भेद मिटाएं
इन्सानी फितरत जगाएं

मैं और मेरा मय का पियाला
खुदा गवाह है सबसे आला 

कवि 'रवि'


0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home