अब क्या कहें
अब क्या कहें, मौसम नागवार गुजरा
हर शख्स को मेरा करतब, नागवार गुजरा
एक कवायद करता रहा, हंसूं और हंसाऊं
तमाशबीन हज़ार थे, किरदार नागवार गुजरा
वो पैमाना, जो जीने का मक़सद बनाया था
मैं खुश था मगर औरों को नागवार गुजरा
क्या लोग क्या रवायतें, ख़ालिस बकवास
हकीकत से यूं रूबरू होना नागवार गुजरा
राहे अमल की चाहत वो तेरी, शानदार थी 'रवि'
इम्तिहानों से जूझना उन्हें नागवार गुजरा
कवि 'रवि'

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