अचरज
ये क्या हुआ के दिल आशना हुआ
कैसे न जाने क्यों काबिले अफसाना हुआ
सहर की सर्दी में भी ताब का एहसास
खयालों में इशरत और उसका पास
चाय की चुस्की कुछ और ही समझा गई
दिल जो अपना ही था बेगाना हुआ
ये इश्को मुहब्बत की बातें
किताबों को बहाल लगती थी
उसके नजरें इनायत के बाद
आजमाईश का पैमाना हुआ
मन की उड़ान की रफ़्तार अजब है
उम्र को भूलकर ढाती गजब है
देरो सवेर ख्वाब टूटना है 'रवि'
ये क्या कम है पलभर जीना हुआ
कवि 'रवि'

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