Friday, 21 July 2023

आईना हूं क्या करूं

लोग आते रूबरू ,क्या करूं
चाहते मेरी नहीं पर,आईना हूं क्या करूं

कोई संतों में है शामिल
कोई है खानाबदोश
कोई धोखेबाज अव्वल 
मजबूर कोई क्या करूं 

आईने की शक्लो सूरत
आप ही है हूबहू
देखते है आप खुदको
मैं नहीं वो क्या करूं

सोचकर ही पेश आओ
जब भी आओ सामने
 शक्ल से औकात दिखती
देखता मैं क्या करूं

एक तू इन्सान के
वाकिफे फितरत ऐ 'रवि'
मैं तेरी तसवीर और तू
आईना मेरा क्या करूं 

कवि 'रवि'
 

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