दृष्टांत
आज पुनः प्रत्यक्ष मिला हूं
परमपिता परमेश्वर से
नित नित सांसे देती मुझको
मां धरती और अंबर से
अतीव श्रम से जो उपजाते
धान अनाज अपने खेतों में
गोपाल कन्हैया को भी रिझाते
अपने घर के आंगन में
जन जीवन को स्वस्थ्य बनाते
वन उपजों के माध्यम से
आज पुनः प्रत्यक्ष मिला हूं
परमपिता परमेश्वर से
ज्ञान और विज्ञान सभी को
विद्यालय में जो सिखलाते
शौर्य और वीरता दृगोचर
नवयौवन को दृष्टि देते
विना किसी लालच के हमको
प्रेम स्नेह और शिक्षा देते
जीवन हमारा जिनके श्रम से
सुदृढ़ बना हर माध्यम से
आज पुनः प्रत्यक्ष मिला हूं
परमपिता परमेश्वर से
अंतरिक्ष पाताल और भूतल
ज्ञान भरा भंडार सभी है
बहुत सा हम ने खोजा है पर
बहुत अनेक खोजना अभी है
ऐसा विश्व विलोभन सब है
जिसके कृपा अभिभावन से
आज पुनः प्रत्यक्ष मिला हूं
परमपिता परमेश्वर से
कवि'रवि'

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