गंदी आंधी
लूटी मेरी आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
गोबरमती महंत तुने कर दिया बवाल
गंदी तेरी नीयत गंदी तेरी हर चाल
गोबरमती महंत तुने कर दिया बवाल
अपनों से लड़ी तूने अजब ढंग लडाई
काटे है गले सबके ना तलवार चलाई
दुष्मन के लिए की है तूने अपनों पे चढाई
रहके भी महलों में सदा फकीरी ही दिखाई
चुटकी में बोस को दिया इस देश से निकाल
गोबरमती महंत तुने कर दिया बवाल
लूटी मेरी आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
गोबरमती महंत तुने कर दिया बवाल
सतरंजी बिछाकर जहां बैठा था हर कोई
मुश्किल थी जो राह शत्रु को आसान कराई
ताकत न थी दुष्मन में कभी हम को हराना
पर तूने सभी के विश्वास को न माना
मारी धोबी पछाड़ ऐसी के सारे हुए बेहाल
गोबरमती महंत तुने कर दिया बवाल
लूटी मेरी आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
गोबरमती महंत तुने कर दिया बवाल
जो खाया हमनें झटका आज तलक न सुधरे
तेरी अक्ल का असर है हम जातियों में बिखरे
एक थे सब गांव शहर धर्म एक था
मानवता के साथ में मानवता से ही गुज़रे
तूने जहां छल करते हुए भजन सुनाए
नाचीज़ को बवंडर के मैदान दिखाए
धीरे धीरे अब समझ रहे लोग तेरी चाल
गोबरमती महन्त तुने कर दिया बवाल
लूटी मेरी आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
गोबरमती महन्त तुने कर दिया बवाल

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