इक छोटा-सा दिल और मैं हूं
इक छोटा-सा दिल और मैं हूं
एक नया-सा डर और मैं हूं
दश्त की लंबी रात है तन्हा
सफ़र नया 'अंजान' और मैं हूं
किसे कहें हमराज़ यहां पर
बिगड़े हुए जज़्बात और मैं हूं
इक तूफां हमराह बना है
टूटी हुई पतवार और मैं हूं
सुलझेगा कैसा यह मंज़र
उलझन की भरमार और मैं हूं
कवि 'रवि'

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