Friday, 28 November 2025

दोस्त नहीं बदलते

न दिल बदलते हैं 
ना जज़्बात ही बदलते हैं 
वक्त के साथ यारों 
हालात बदलते हैं 
बस वक्त का तकाजा है 
मसरूफ हूं इस कदर 
दोस्त याद आते हैं 
पल दर पल मगर 
जूस्तजू अंजाम में बदलने से पहले 
खयालात बदलते हैं
'रवि' एक लम्हा बचाके रख 
दोस्तों के वास्ते 
कायनात ठुकरा देगी लेकिन 
दोस्त नहीं बदलते 
कवि 'रवि' 


Saturday, 22 November 2025

कहकशां

कहकशां सी मेरी सपनों की दुनिया है 
किसी एक पर नज़र ठहरती नहीं है 
इसे समझूं या उसे जानूं कश्मकश में 
हर रात गुज़र जाती है 
उम्र लेकिन 
उसी मक़ाम पर ठहर जाती है 
दिन निकलते ही जीने की उधेड़बुन 
मुझे मुझसे ही ले जाती है कहीं दूर 
जहां जिंदगी सिकुड़ सी जाती है 
ज़माने की फ़िक्र और समाजों का बोझ 
लिए जाता है अनचाहे सवालों तक 
किससे कहें कि परेशानी क्या है 
हर एक की कहानी यही है 
इंतजार फिर एक बार होता है 
कि रात आए नींद आए और मैं खो जाऊं 
कहकशां सी मेरी सपनों की दुनिया में 
इस बार फकत हकीकत में बदल जाने के लिए 
कवि 'रवि'

Thursday, 20 November 2025

गुजारिश


याद आती है वो शाम 
जिसने हमें मिलाया था 
फिसलती उसकी नज़रों में 
मैंने मुझे ही पाया था 
वो लम्हा अकीदत का 
प्यार के खातिर 
कुर्बान हुआ 
वो कैसा समां ईश्वर तूने 
मेरे नसीब में लाया था 
पर सच कहूं तो अहसानमंद हूं तेरा 
मेरे नसीब के मानी बदलने वाली से 
तूने मुझे मिलाया था 
अरसा बीत गया है लेकिन 
प्यार है के कम नहीं होता 
सांसों ने ज़ेहन के साथ मानो 
अटूट रिश्ता बनाया था 
अब एक गुजारिश है ईश्वर तुझसे 
बस वैसे ही हमें बुला लेना 
जैसा हमें मिलाया था 
कवि 'रवि'

Thursday, 6 November 2025

जुनून ए दुआ

दुआओं का जूनून इस क़दर हावी रहा 
संगदिल ज़ख्म देते रहे मैं मुस्कुराता रहा 
क्या अजब इंसाफ है खुदाई का 
मेरे सदके पे उनको खौफ आता रहा 
दुनिया से फारिग होकर चला भी जाऊं अगर 
मेरे किरदार का चर्चा मेरे पीछे आता रहा 
और अब न तरसा मेरे जिंदगी के मालिक 
उम्मीद का हर लम्हा तुझसे भी दूर जाता रहा 
'रवि' अक्स भी साथ छोड़ जाए तो क्या है 
तेरा नाम सदियों को भाता रहा याद आता रहा 
कवि 'रवि'