Sunday, 21 December 2025

दोस्त हैं पर कभी तकदीर बन आता है वो

ज़माने भर की तकरीरें बुन ले आता है वो 
कोई नसीहत, कभी फर्मान दे जाता है वो 
ये मेरा दिल ही ऐसा है सभी को साध लेता है 
कद्र उसकी नज़र अंदाज़ कर जाता है वो 
मेरी तस्वीर मुझे चंद खामियां दिखाती है 
मेरे मूंह पर मेरी तारीफ कर जाता है वो 
मेरा उसका कभी मिलना यूं तो एक हादसा सा था 
मगर अब लम्हे लम्हे की खबर रख जाता है वो 
परेशां देखता मुझको कभी तो ढांढस बंधाता है 
मेरे एवज के आंसू भी बहा जाता है वो 
करिश्मा है उसे हर फन का हुनर हासिल है 
संग नुमा मुझमें कोई बुत की तलाश कर जाता है वो 
कवि 'रवि' 

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