Wednesday, 18 March 2026

हौसला रख

वो बाग ही क्या जो गुलों का इस्तकबाल ना करें 
वो शाख ही क्या जो फलों से लबालब ना भरें 
वो दिल ही क्या जो जूस्तजू की ईजाद ना करें
वो शख्स ही क्या जो ख्यालों को हकीकत में तब्दील ना करें 
वो कैसा ही कहलाएगा मौसम जो बहार ना धरें 
वो लम्हा ही क्या जो मौके का इंतजार ना करें 
नसीबों को लानत देने की कभी कोई जुर्रत ना करें 
इरादों की खातिर जो मर मिटने की हिम्मत ना करें 
कवि 'रवि' 

Saturday, 14 March 2026

हृदयांत भावनांचा....

हृदयांत भावनांचा (वि)जय तो ठरून गेला 
एक थेंब आसवाचा क्षरितां विरून गेला 
माझ्याच पावलांनी नाकारले स्फुरण ते 
अंतिम श्वास होता तो ही सरून गेला 
देता तयास अवघे झालो निःसंग आता 
अंधार अंतरीचा मज सावरून गेला 
एकेक ती कहाणी राहील साक्ष म्हणुनी 
शून्यातची विहरला शून्यास पांघरून गेला 
भ्रम हा तरी मला कां छळतो उगाच आता 
मिथ्या अशा जगी ह्या'रवि' गांगरून गेला 
कवि 'रवि' 

Sunday, 8 March 2026

इस शहर की आबोहवा

इस शहर की आबोहवा कुछ धुंधला गई है 
फिर बियाबानों की तरफ जाने की घड़ी आ गई है 
गाड़ियों-मशीनों-लाऊडस्पीकरों की आवाज कर्कश
पंछियों की किलकारियां जाने कहां खो गयी है 
सुबह सवेरे उड़ते पंछियों को, सूरज को भुलाकर 
बड़े बड़े हवाई बेडों को देखने की नौबत आ गई है 
मैं और मेरा नन्हा-सा दिल फिर से सपने संजोता है 
फिर बियाबानों की तरफ जाने की घड़ी आ गई है 
कवि 'रवि'

Friday, 6 March 2026

बुरा ना मानो होली है

उनके आंखों में देखते थे हजारों 
लगता था चाहत उनकी हमीं पर है यारों 
आव देखा न ताव बस ब्याह कर बैठे 
आंखों की गहराई से अभी तक ना उभर सके 
उनकी आंखों का खौफ आजकल इतना हावी रहता है 
वो कहीं रुसवा ना हो इसलिए यह दिलो दिमाग जागता रहता है 
क्या ही तासीर है इस अजीब पिंजड़े की 
वो कहती हैं कई बार चले जाओ 
पर हिंमत नहीं होती है उड़ने की 
अब बस लानत भेजता रहता हूं किस्मत के लिखने वाले को 
हंसना मत उसका जवाब आता है 
यह कहते हुए 
अरे नादान शुक्र कर तुझे जो भी दिया है सोच समझकर दिया है 
तेरे पड़ोसी को तुझसे सब अलाहिदा दिया है 
एकबार झांकना ज़रूर उसके गिरेबान में 
तू पाएगा खुशियां ही खुशियां भरी पडी है तेरी राहों में।
कवि 'रवि'