Monday, 11 May 2026

फुजूल है

वक्त गुजर जाने के बाद की 
तकरीरें फुजूल है 
नफ़रत दिल में दरख़्त बन गई हो तो 
नुमाइश ए इशरत फुजूल है 
अपनी तस्वीर में जहां खोजने वालों 
किसी इबादतगाह पर टिकी 
पेशानी फुजूल है 
चंद बनते हैं हमसफ़र 
मंजिल की तलाश में 
वक्त के साथ चल न सके तो 
राहबानी फुजूल है 
कवि 'रवि'

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