फुजूल है
वक्त गुजर जाने के बाद की
तकरीरें फुजूल है
नफ़रत दिल में दरख़्त बन गई हो तो
नुमाइश ए इशरत फुजूल है
अपनी तस्वीर में जहां खोजने वालों
किसी इबादतगाह पर टिकी
पेशानी फुजूल है
चंद बनते हैं हमसफ़र
मंजिल की तलाश में
वक्त के साथ चल न सके तो
राहबानी फुजूल है
कवि 'रवि'

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