नज़्म: उलझन
नज़्म
दरो दीवार को
तूफान से बचाएं कैसे
शदीद है मौसम छप्पर को
संवारें कैसे
तेरे ख्यालों में खोये रहते हैं
मज़ा आता है
हकीकत से नुमाया होने से
खुद को बचाएं कैसे
वो कहते है अक्सर
मुश्क की रफ़्तार बताओ
इश्को जज़्बात पर नहीं होता ज़ब्त
बताएं कैसे
हुए नामवर अज़ल से अब तक
फना ही तो हुए
ज़िंदा रहते हैं अल्फाज़ क़यामत तक
सुझाएं कैसे
मेरी गुमशुदगी
मेरे किरदार को पसंद आती है
लंबी होती हुई परछाईं को
खुद से छुड़ाए कैसे
अकीदतमंद मैं
हर पल इत्मिनान रखता हूं 'रवि'
हाले दिल फिर भी बेकाबू हैं
सुनाएं कैसे
कवि 'रवि'

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