बंगाल तब का और अब का
बंगाल के विषय में कुछ कहने से पहले एक विशेष महत्व की बात को मैं उद्धृत करना चाहता हूं कि "बंगाली जनता का मूल स्वभाव क्रांतिकारी है"!
विधानसभा चुनाव २०२६ के नतीजे आज ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस को हराकर भारतीय जनता पार्टी को जीत रहे हैं। बंगाल की राजनीति की विभीषिका यह है कि बंगाल में सदैव ही कुछ ऐसे तत्व पूरी जनता पर भारी पड़ जाते हैं जो उनके शोषण के सिवाय उन्हें कुछ नहीं देते।
आइये समझें बंगाल का कल और आज!
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में प्रखरता से सहभागिता करने में, संघर्ष की बलि वेदीपर अनेकों आहुति देने वाले राष्ट्रभक्तों में बंगाल - महाराष्ट्र - पंजाब प्रमुख प्रांत हुआ करते थे। महाराष्ट्र और पंजाब को स्वतंत्रता पश्चात् जो शासन व्यवस्था मिलती गई वो बंगाल की व्यवस्था से आजतक भिन्न रहथी रही है।
शुरुआत में बंगाल में भी कांग्रेस की सरकारें १५ वर्ष तक रही। लेकिन, स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद ही वहां असंतुष्ट विचारधाराओं ने पुरजोर तरीके से काम किया और साम्यवाद की जड़ें मजबूत बनती गई। नक्सलवाद को जन्म देने वाले नेता उस समय के उच्च शिक्षित थे। बंगाल में इस हिसाब से एक नयी क्रांति पनप रही थी, साम्यवादी नेता यशस्वी हुए और एक लंबे अरसे तक बंगाल साम्यवादी सरकार के अधीन रहा।
मित्रों, बंगालियों का एक स्वाभाविक दोष है कि वे क्रांति तो कर लेते हैं परंतु, उसके बाद अपने भोलेपन से उन नेताओं पर एक तरह से अंधा विश्वास रखते हैं। कांग्रेसियों से मोह भंग हुआ तो साम्यवादियों पर भरोसा कर बैठे। साम्यवादियों से उकता गए तो फिर से कांग्रेस की असंतुष्ट नेत्री ममता बनर्जी पर अंधविश्वास दिखाती रही।३५ वर्ष कम्युनिस्टों के और १५ वर्ष तृणमूल कांग्रेस के उनका भ्रमनिरास होने में लग गए। बंगाल के आसपास के राज्य बारंबार उन्हें यह समझाते रहे कि ममता सरकार उतना ही निर्मम है जितना कम्युनिस्ट सरकार हुआ करता था। खैर, अब क्यों न हों लेकिन अंधेरा छटा है और कंवल खिला है।
मैं इसे भी बंगालियों के विचार प्रवर्तन का अनूठा उदाहरण ही मानूंगा!
बदलते समय की आवश्यकता है कि बंगाल सार्वभौमिकता का पुरस्कार कर समग्र भारत की संकल्पना को रचाने बसाने में ठीक वैसा ही योगदान दें जैसा स्वतंत्रता संग्रामके समय हुआ करता था।
मैं अपेक्षा करता हूं कि चुनी हुई नयी भाजपा सरकार बंगाल को उसकी राष्ट्रीय अस्मिता पुनः प्रदान करेगी। वहां के भद्रलोक और आम जनता में लोकप्रियता प्राप्त करेगी और इस क्रांतिभूमि के माध्यम से अखंड भारत की नींव रखेगी।
भारत माता की जय
वंदे मातरम्!
कवि 'रवि'

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