Saturday, 27 September 2025

Tiny world

Yeh yeh yeh 
It's a tiny world 
That I live in 
No much depth to the pond 
That I wish to dive in
Yeh yeh yeh 
It's a tiny world 
That I live in 
No big things to happen 
Those could be thrive in 
Yeh yeh yeh 
It's a tiny world 
That I live in 
Hasn't any ambiance 
That may produce a chance 
To make me like a dream in 
Yeh yeh yeh 
It's a tiny world 
That I live in 
Yet it means to be a lot to me 
I eat with siblings 
Can sleep with them head to head 
No complaint at all 
About sharing the bed 
Yeh yeh yeh 
It's a tiny world 
That I live in 
My mom and Pop breathe together 
When with them We are without fear 
Yeh yeh yeh 
It's a tiny world 
That I live in 
I feel great to have it 
And thankful to the rest of the world 
It has been meglegant to it 
Oh yeah yeah yeah 
Kavi 'Ravi'

बस दुआ ही दवा है

कोई मर्ज ऐसा जो छूटता नहीं है 
सिलसिला दवाओं का टूटता नहीं है 
मेरा मरहला काम आता नहीं है 
कोई मशविरा भी सुहाता नहीं है 
मरे रोज़ कोई तो कैसी तसल्ली 
मेरा राहबर संग आता नहीं है 
हाकिम खुदाया परेशां परेशां 
कोई टोटका काम आता नहीं है 
नासाज़ दिल को न शिकवा किसी से 
'रवि' चाह वो क्यों ही सुनता नहीं है 
मिला भी हुनर गर फना हो सकूं मैं 
ये दिल राहे जन्नत पे आता नहीं है 
कवि 'रवि'

मैकदा और मैं

मैकदे से निकल जाता हूं तो 
शुरू हो जाता है मेरा ज़िक्र 
लोग कहते ये कैसा है शख्स 
खुद की चिंता न दुनिया की फ़िक्र 
साकी के रूबरू होते ही 
उसपे आ जाता है सुरूर 
जाम तलब होते है 
महफ़िल करती है गुरूर 
इशरते महफ़िल समझते हैं मुझे 
अश्कों का अंबार झुपा रखता हूं मगर 
क्या ग़म क्या तन्हाई 
सब ढकोसला सा है 
'रवि' जाम ए तरन्नुम 
सुकून दे जाता है अक्सर 
कवि 'रवि' 

Sunday, 21 September 2025

मेरा मंजिल की तरफ जाना

मेरा मंजिल की तरफ जाना भी
उसको नागवार गुज़रा
शीशे बिछाता रहा
जिस रास्ते से मैं गुज़रा
फलक पे बैठा वो सब देखता रहा मगर
मूंह फेर कर बैठा
जूं ही मेरे आगे कारवां गुज़रा
 बिछी बिसात पर चलना
तेरी फितरत का हिस्सा सही
तेरी शह और मात की खातिर
देख उतावले पन में ज़माना गुज़रा
वो सिमटते रहे बेइंतहा
अपनी खुशगोई के लिए
लुटाने की तलफगोई में
मेरा हर लम्हा गुज़रा
'रवि' आलमें अकीदत में
तमन्नाओं को झोंक दे
याद करते तेरी हसरतें नाकाम
सुगबुगाते तेरे बाद ज़माना गुज़रा
कवि 'रवि'

Saturday, 20 September 2025

बहार आई है

फिज़ा रंगीन हो गई है 
बारिश भी रुक सी गई है 
आसमां में बदलियां 
सुंदर नक्काशी में तब्दील हो रही है 
हमारे पारंपरिक त्यौहारों की 
शुरुआत हो रही है 
फसलें अपने यौवन पर है 
हमें यह नया वातावरण 
नई सौगात दे रहा 
आओ चलें अपनी संस्कृति को 
सही मायनों में जियें 
सुख-शांति तथा समृद्धि का 
आस्वाद लें 
सुखमय जीवन की कामना को 
अपने परिश्रम से पूरा करें 
कवि 'रवि'

Friday, 19 September 2025

सिलसिला ऐ वक्त

उम्र गुजर जाती है मगर 
यादों का सिलसिला 
बरकरार रहता है 
बिते हुए लम्हों को 
बार-बार जीने को 
दिल बेकरार रहता है 
राहें भटक जाती है, 
किरदार बदल जाते हैं 
सबकुछ धुंधला जाता है 
लेकिन 
इंतजार बेशुमार रहता है
कवि 'रवि'